संवाददाता विमल सिंह बरेली BREAKING RV NEWS
बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग के शोधार्थी राघवेंद्र को वित्तीय साक्षरता और घरेलू संपदा संचय पर किए गए महत्वपूर्ण शोध के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उनका शोध विषय था— "उत्तर प्रदेश के चयनित निवासियों के संदर्भ में वित्तीय साक्षरता का घरेलू संपदा संचय पर प्रभाव"। यह शोध विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. तुलिका सक्सेना के निर्देशन में संपन्न हुआ।
शोध के दौरान उत्तर प्रदेश के शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 593 परिवारों से जानकारी जुटाई गई। अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि वित्तीय साक्षरता और घरेलू संपदा के बीच सीधा संबंध है। जिन परिवारों में वित्तीय जानकारी बेहतर थी, वहां बचत और निवेश की आदतें भी अधिक मजबूत पाई गईं।
हालांकि सर्वेक्षण में केवल 34.1 प्रतिशत लोग ही उच्च वित्तीय साक्षरता की श्रेणी में शामिल पाए गए, जबकि 25.1 प्रतिशत लोगों की वित्तीय समझ बेहद सीमित थी। ग्रामीण महिलाओं, बुजुर्गों और कम शिक्षित वर्ग में जागरूकता की सबसे अधिक कमी देखी गई।
शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि परिवार की आय संपदा बढ़ाने का सबसे बड़ा आधार है। इसके बाद शिक्षा और वित्तीय साक्षरता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वहीं सरकारी या निजी नौकरी का घरेलू संपदा पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पाया गया।
एटा जिले के मरथरा देवकिशन गांव निवासी राघवेंद्र बीएचयू से एमबीए कर चुके हैं और यूजीसी-नेट उत्तीर्ण हैं। उनके नाम 19 अंतरराष्ट्रीय शोध प्रकाशन और दो पेटेंट दर्ज हैं। वे विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
राघवेंद्र का कहना है कि वित्तीय साक्षरता केवल धन प्रबंधन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा की मजबूत नींव है। उन्होंने अपने शोध में स्कूलों और पंचायत स्तर पर व्यावहारिक वित्तीय शिक्षा शुरू करने, ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान चलाने तथा जनधन जैसी योजनाओं में खातों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध उत्तर प्रदेश में वित्तीय नीतियों के निर्माण और बैंकिंग सेवाओं को आम लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकता है।
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