Top News

अवैध निर्माण का खेल, अब बिल्डरों की बारी l


एलडीए कर्मचारियों, अभियंताओं और आईजीआरएस के बाद अब अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डर भी जांच के दायरे में

लखनऊ। शहर में अवैध निर्माण का खेल अब सिर्फ फाइलों, नोटिसों और शिकायतों तक सीमित नजर नहीं आ रहा। एलडीए के कर्मचारियों और अभियंताओं के बाद अब अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डरों और उनके कथित सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की चर्चा तेज हो गई है।

उच्च स्तर पर की गई एक शिकायत के बाद ऐसे बिल्डरों की सूची तैयार किए जाने की बात सामने आई है, जिन पर कथित तौर पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर निर्माण कराने के आरोप हैं। शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया है कि आखिर कुछ लोग कथित तौर पर अवैध इमारतें खड़ी करवाकर ही करोड़पति कैसे बन गए?

मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिकायत में एलडीए के उन कर्मचारियों और अभियंताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो कथित तौर पर निजी बिल्डरों के लिए काम करने या उन्हें लाभ पहुंचाने में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि यहियागंज क्षेत्र के एक चर्चित बिल्डर और उनके कुछ सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी जांच शुरू किए जाने की चर्चा है। सूत्रों का दावा है कि संबंधित लोगों पर कथित तौर पर अवैध निर्माण में मदद करने के आरोप हैं। इतना ही नहीं, मामले से जुड़ी रिकॉर्डिंग समेत अन्य तथ्यों और साक्ष्यों की भी जांच किए जाने की बात सामने आ रही है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और जांच पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक-दो निर्माणों तक सीमित न रहकर अवैध निर्माण के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकता है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि जांच की सुई सिर्फ फाइलों में घूमती है या फिर उन हाथों तक भी पहुंचती है, जिनके इशारे पर बिना अनुमति के निर्माण की मंजिलें खड़ी होती रहीं।

नक्शा भले पास न हो, लेकिन अगर निर्माण की मंजिलें बढ़ती रहें और कमाई करोड़ों तक पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नियमों की किताब किस अलमारी में बंद थी और सुविधा की चाबी किसके पास?

यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है और जिम्मेदारी तय की जाती है, तो कार्रवाई केवल बिल्डरों तक सीमित न रहकर अवैध निर्माण के पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने ला सकती है।

फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच की आंच कितनी दूर तक जाती है, सिर्फ ईंट-पत्थर तक या फिर उन लोगों तक भी, जिनकी कथित मेहरबानी से अवैध निर्माण का कारोबार फलता-फूलता रहा।

Post a Comment

Previous Post Next Post
Breaking RV News
Breaking RV News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume